सजनी

सजनी देखो, मेरी एक बात सुनो, कबसे नहीं बोली तुम, कुछ बात तो करो, जो भी बात हुई, छोटी बड़ी कुछ भी, जाने दो, तुम ऐसे तो ना रूठो। सजनी, तुम्हे तो पता ही है, मैं कैसा हूँ, छोटी छोटी बात पर बिफर पड़ता हूँ। पर तुम तो वो धागा हो ना, जो बांधे रखता है, तुम टूटो तो मैं भी बिखर पड़ता हूँ। दुखता मुझे भी है सजनी, जो चोट लगती है तुमको , छलनी होता है कलेजा मेरा भी, ठेस लगती है जब तुम्हारे दिल को, बहुत गुस्सा हो ना, मैं जानता हूँ। क्या पता तुम्हे अच्छा लगे, चलो थोड़ा सा मुझे आज मार ही लो। ...

July 31, 2014  · #235

The Suicide Note of a Lonely Girl - Part 2

She’s dead. No more. Why she did what she did, I wish I could but, I don’t know. All I know is that she’s not coming back. And she takes with her every question I ever had. She was simple, silent, lost in her thoughts, As if she didn’t belong to this world, She wasn’t like those typical girls her age, Doing jib jab yip yap all day, She used to say everything through her eyes, And almighty knows, I liked her that way. ...

July 27, 2014  · #231

The Suicide Note of a Lonely Girl - Part 1

Today I take my life, Hopeful, that the pain will now subside, It’s just been lonely and dreadful, May be I will finally get free tonight. I don’t know why I took so much time to do, What I should have done so much earlier, May be I was afraid to die, It’s amusing. Living was so much scarier. Sorry mom, I just couldn’t do it, No therapy would help me through it, My - now burnt- diary, my tear soaked pillow, Knew more about me, than you could ever know me, I just wanted to feel some emotions mom, All that you could provide me were some more sedatives. ...

July 26, 2014  · #230

जुगनी

की केवान जुगनी को अस्सी वी, जुगनी कुज समझती सी नहीं, जे कहाँ लड़ना है अज्ज मैनूं, ते लड़े विन रुक्दी वी नहीं। जुगनी नु जे ख़ुराफ़ात है, जे वि करो, कदो छिपदी सी नहीं, कित्ती वार बोलया न कर, न कर जुगनी, बिन किये गलती जुगनी, हाय, कुज सिखदी सी नहीं। ~रबी [ What shall I say to Jugni, Jugni doesn’t understand anything, If I say I want to fight today, Then she won’t stop before fighting. The mishief that’s inside Jugni, Whatever you don’t, it won’t hide, How many times did I say, don’t do it, don’t do it Jugni. But without making mistakes, alas, Jugni doesn’t learn anything ] ...

July 15, 2014  · #219

पाँव

कभी लाओ अपने पाँव हमारे आँगन में भी, बहुत दिनों से गलियारे में हरियाली नहीं हुई है, जहाँ जहाँ भी पड़ जाते हैं कदम आपके, वो धूल भी सोने के दाम बेचीं जाती है। पर कुछ बदकिस्मत नहीं पहचानते इन कदमो की कीमत को, तो क्या पता इस बहाने पाँव की नमी मिल जाय हमारी ही सूखी जमी को, अच्छा ही है, उम्मीद है, उम्मीद बंधे रहने दो, और हाँ एक बात और… इन कदमो को, जन्मदिन मुबारक हो। ...

July 11, 2014  · #215

शगुन

भले कुछ न दिखाई दे, तेरी आवाज हमेशा सुनाई दे, जो साँझ हो और आये शगुन मौत का, मैं ढलूँ धीरे धीरे… तेरी आवाज की परछाई में। ~रबी [ Even if I don’t see anything, I hope to hear your voice, When the evening comes and brings the auspicious time of death, I will go down slowly, in the shadow of your voice. ] ## This little piece has been in my draft for almost an year. I just couldn’t get my head around to completing the first two lines. I initially envisioned it as a full poem then tried to write a 4 liner and then asked friends for ideas. Nothing helped. ...

June 28, 2014  · #202

गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया

गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया, साकी ने फिर से मेरा जाम भर दिया… लेते रहे नाम उनका रह रह कर, और वो हैं की हमको ही बदनाम कर दिया, गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया… महफिलें जो कहती थी मासूम हैं बहुत, एक हंसी भर से वहां क़त्ल-ए-आम कर दिया, साकी ने फिर से मेरा जाम भर दिया… ऐसे जले विरहा में उनके लिए, उस शमा ने हमको परवान कर दिया, गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया… ...

June 10, 2014  · #196

बहुत दिन हुए, कुछ नया नहीं लिखा तुमने...

आज फुर्सत में बैठे, यूं ही याद आया मुझे, बहुत दिन हुए, कुछ नया नहीं लिखा तुमने… उम्मीद है, कलम तुम्हारी अभी टूटी नहीं होगी, लहू मिले आंसुओं की स्याही अभी सूखी नहीं होगी, उम्मीद है अभी भी तुम आयतें लिखते होगे किसी के लिए, उम्मीद है तुमसे तुम्हारी नज़्म अभी रूठी नहीं होगी। पता नहीं तुम्हे याद है भी या नहीं, कई दिन पहले तुमसे एक फरमाइश किया करता था अक्सर, शायद तुम भूल गए, शायद तुम उसे पूरी करना चाहते ही नहीं, चलो कोई बात नहीं, लिखना ना छोड़ देना मगर, पूरी ना कर सके फरमाइश अगर। ...

June 5, 2014  · #192

भाई की सगाई

आप आये मेरे भाई की सगाई में क्या जरूरत थी, खुद तो आये ही पूरा परिवार लाने की भी आपने जुर्रत की, साला अब क्या खाने के पैसे तुम्हारे पडोसी आके देंगे, खुद तो ठूस कर निकल लोगे, आधे जने अब भूखे मरेंगे। यार सगाई पर बुलाने का तो सिर्फ रिवाज है, इसका मतलब ये तो नहीं आ धमको सही में, अगर नहीं कोई काम काज है ? मैं तो सोच ही रहा था तुम्हारी मनहूस शकल न देखनी पड़े, भगवान करे तुम्हारे भाई की शादी हो तो गली के कुत्ते खाने पे पहले ही टूट पड़े। ...

May 24, 2014  · #190

क्या वो भी

कभी कभी सोचता हूँ, ये किसने अँधेरे की ओट में ऐसा सवेरा जलाया होगा, ये किसने दिल पिघला कर इस मोम को बनाया होगा, वो कौन था जिसे रात-रात भर नींद नहीं आती होगी, जो उसने अपने ख़्वाबों को इतने आहिस्ता से सजाया होगा। कभी कभी सोचता हूँ, जब ये बोलती होगी, क्या सच में फ़िज़ा महकती होगी, क्या सच में इसकी महफ़िल में चिड़ियाँ आकर चहकती होंगी, ये हाथों में चमकते कंगन, ये गले में सफ़ेद हार, ये कानो में दमकते झुमके, ये तन पे कत्थई लिबास, क्या तब भी दुनिया इसे ही खूबसूरती की हद्द कहती होगी ? ...

May 23, 2014  · #189