जब तुम आओगी
खुशियाँ तलाशते बहुत दुख दिए हैं तुम्हे, तुम्हारा आँचल भरूंगा अब इन्हीं खुशियों से। मैं जीना थोड़ा भूल सा गया हूँ, जब तुम आओगी न तो अब से जीने लगूँगा। कई रातें काट दी खुली आँखों मे, जगाये रखा मुझे तुम्हारे सपनों ने। तुम्हारे ना मिलने का डर सोने नही देता मुझे, जब तुम आओगी न तो चैन से सोया करूँगा। शिकायत तुम्हें फ़िज़ूल ही रहती है मुझसे, मैं अब भी वही हूँ, जैसा मिला था तुम्हें। सच है, मैं निकला नहीं एक अरसे से बारिश में, जब तुम आओगी न तो जी भरकर भीगा करूँगा। ...