सुराख

रूह में सुराख हो तो दर्द रिस्ता है धीरे धीरे, रूह भीगती है दर्द में तो भूल जाते हैं सब नाते रिश्ते, कोई समझता ही नहीं इस लाइलाज रोग को, सिवाय उसके जिसकी रूह में खुद सुराख हो, दर्द सूखता भी नहीं, बहना रुकता भी नहीं, टूट जाता है परिंदा ये सुराख भरते भरते। ~रबी [ When there is a void in the soul, the pain trickles slowly, When the soul drenches in pain, all the relations get forgotten, No one understands this incurable disease, Except the one whose own soul has a void in it, The pain doesn’t dry, neither does it stop bleeding, The bird breaks down trying to fill that void. ] ...

June 27, 2014  · #201

आईना

एक दिन दिल सीने से निकाल कर रख दिया आईने के सामने, बोला, देख। देख कितना बदसूरत है तू। क्यों करता है फिर मोहब्बत किसी से, मैं हूँ न तेरे पास, फिर तुझे और किसी की जरूरत है क्यों? दिल ने आईना बड़े गौर से देखा, बोला, बदसूरत सही मैं, पर पाक हूँ। तुम मेरे साथ हो पर मैं तुम्हारा ना रहा, मैं तुम में धड़कता तो हूँ, पर दर्द मुझमे अब तुम्हारा ना रहा, और आईने में देखने की बात जाया ही करते हो तुम, मेरी बंदगी तो मोहब्बत से है बस, मोहब्बत करने वाला कभी हमारा ना रहा। ...

June 26, 2014  · #200

जलन

पता नहीं तुझसे इतनी जलन क्यों होती है, तुझे देखता हूँ खुश तो एक चुभन सी होती है, ये हैरान करने वाली बात नहीं तो और क्या है, क्योंकि तू परेशान हो तो भी एक घुटन सी होती है। शायद मुझे जलन तुझसे नहीं, ना तेरी ख़ुशी, ना तेरी हंसी-ओ-हालात से है, तेरी ख़ुशी में शरीक नहीं मैं, शायद जलन मुझे इस बात से है, कोई और तेरी ख़ुशी का जरिया है, ये मुझे बर्दाश्त नहीं, और तुझे इस बात की कतई जलन नहीं, जलन मुझे इस बात से है। ...

June 25, 2014  · #199

देहलीज़

मौत की देहलीज़ पर पहुँच कर याद आया मुझे, जो ज़िंदा पीछे छूट गए, अब उनसे मुलाकात ना होगी, ये देहलीज़ भी बेवफा ही लगती है बशर, जो पार बैठे हैं, उन्हें भी मेरी सूरत याद ना होगी। ~रबी [ When I reached the doorsteps of death, I remembered, Those who are left behind, I won’t be able to meet them anymore, And these doorsteps also seem disloyal to me, my friend, Those who are sitting across, they also won’t remember my face. ] ...

June 24, 2014  · #198

तहज़ीब

गलतफ़हमियों में तुम भी जीते हो, गलतफहमियों में हम भी पलते हैं, क्या आवाज उठायें, जो गर तुम हो गलत भी, जो हम खुद अक्सर गलतियां करते चलते हैं। बदतमीज़ी की नुमाइश करने वालों की दुनिया में फिर भी कमी नहीं, तहज़ीब को आहिस्ता से परोसने वाले कम ही मिलते हैं। ~रबी [ You also live in misunderstandings, We also thrive in misunderstandings, Why raise our voice, even if you are wrong, When we often make mistakes ourselves. Even then there is no shortage of those eager to exhibit their insolence, Dearth is of those who softly serve their mannerism. ] ...

June 23, 2014  · #197

गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया

गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया, साकी ने फिर से मेरा जाम भर दिया… लेते रहे नाम उनका रह रह कर, और वो हैं की हमको ही बदनाम कर दिया, गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया… महफिलें जो कहती थी मासूम हैं बहुत, एक हंसी भर से वहां क़त्ल-ए-आम कर दिया, साकी ने फिर से मेरा जाम भर दिया… ऐसे जले विरहा में उनके लिए, उस शमा ने हमको परवान कर दिया, गुन्छा कोई मेरे नाम कर दिया… ...

June 10, 2014  · #196

उन्हें क्यों कहता फिरूँ ?

पागल कहती है दुनिया मुझे, मैं उन्हें पागल कहता हूँ, सच का पता है मुझे और तुझे, तो फिर उन्हें क्यों कहता फिरूँ? दुनिया हंसती है मुझ पे, जो करता हूँ तारीफें तेरी, कहती है क्यों लिखता हूँ उस पे, जो किसी को दिखती ही नहीं, तू नहीं इस दुनिया की, ये दुनिया समझती नहीं, तो फिर क्यों उन्हें समझाने बैठूं ? काफ़िर कहती है दुनिया मुझे, मैं उन्हें काफ़िर कहते हूँ, रब का पता है मुझे और तुझे, तो फिर उन्हें क्यों कहता फिरूँ ? ...

June 8, 2014  · #195

कागज़

जो कागज़ हमने रात भर लहू से भरे थे, वो सुबह तुम्हारे आंसुओं से भीगे पड़े थे। ~रबी [ The pages that I filled my blood whole night, In the morning they were soaked in your tears. ]

June 7, 2014  · #194

तुम मेरी जान ही क्यों नहीं ले लेते?

क्यों सोने नहीं देते, क्यों रोने नहीं देते, क्यों हंसने नहीं देते, क्यों खुश होने नहीं देते। जो मैंने तुम्हे छोड़ा, तुम मुझे छोड़ क्यों नहीं देते, जो धुंधली पड़ गयी तुम्हारी यादें, आँखों पर से अपना अक्स हटा क्यों नहीं लेते, देखो अब तो खुद से भी नफरत हो चली, तुम खुद से नफरत करने क्यों नहीं देते? राख किये कल को एक अरसा हो गया, तुम अस्थियां भिगोने क्यों नहीं देते, जो दो कदम जाऊं तुमसे दूर, तुम तीसरा कदम लेने क्यों नहीं देते, खींच लेते हो सांस हलक से, दम घुटता है, पर दम घुटने भी नहीं देते। ...

June 6, 2014  · #193

बहुत दिन हुए, कुछ नया नहीं लिखा तुमने...

आज फुर्सत में बैठे, यूं ही याद आया मुझे, बहुत दिन हुए, कुछ नया नहीं लिखा तुमने… उम्मीद है, कलम तुम्हारी अभी टूटी नहीं होगी, लहू मिले आंसुओं की स्याही अभी सूखी नहीं होगी, उम्मीद है अभी भी तुम आयतें लिखते होगे किसी के लिए, उम्मीद है तुमसे तुम्हारी नज़्म अभी रूठी नहीं होगी। पता नहीं तुम्हे याद है भी या नहीं, कई दिन पहले तुमसे एक फरमाइश किया करता था अक्सर, शायद तुम भूल गए, शायद तुम उसे पूरी करना चाहते ही नहीं, चलो कोई बात नहीं, लिखना ना छोड़ देना मगर, पूरी ना कर सके फरमाइश अगर। ...

June 5, 2014  · #192